उत्तर प्रदेश

मंत्रियों के काफिले में 50% कटौती, 2 दिन WFH; PM मोदी की अपील पर एक्शन में योगी सरकार

वैश्विक हालात, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मितव्ययिता (Austerity) अपील का असर अब राज्यों में भी दिखाई देने लगा है. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सरकारी खर्च और ईंधन खपत कम करने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री, मंत्रियों और वीआईपी काफिलों में 50 प्रतिशत तक कटौती के निर्देश दिए हैं.

लखनऊ में हुई उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि पेट्रोल-डीजल की खपत कम करना अब केवल सरकारी फैसला नहीं बल्कि आर्थिक जरूरत बन चुका है. सरकार ने वर्क फ्रॉम होम, सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो और PNG के अधिक उपयोग के साथ-साथ वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा देने की रणनीति तैयार की है.

आखिर योगी सरकार ने इतने बड़े फैसले क्यों लिए?

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान देशवासियों से अपील की थी कि वे पेट्रोल, डीजल और गैस जैसी आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करें. पीएम मोदी ने कहा था कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में विदेशी मुद्रा भंडार बचाना और ईंधन की खपत कम करना बेहद जरूरी है. प्रधानमंत्री ने कहा था कि ‘आज समय की मांग है कि पेट्रोल, गैस, डीजल और ऐसी चीजों का बेहद संयम के साथ इस्तेमाल किया जाए. हमें आयातित पेट्रोलियम उत्पादों का उपयोग केवल जरूरत के हिसाब से करना होगा. इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि युद्ध के दुष्प्रभावों को कम करने में भी मदद मिलेगी.”

इसी अपील के बाद यूपी सरकार ने तेजी से एक्शन प्लान तैयार किया है.

क्या-क्या निर्देश दिए गए हैं?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों और मंत्रियों को कई अहम निर्देश दिए हैं. इनमें सबसे बड़ा फैसला वीआईपी काफिलों में 50% तक कटौती का है.

इसके अलावा सरकार ने-

सरकारी वाहनों का इस्तेमाल सीमित करने
अनावश्यक यात्राएं रोकने
सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने
PNG और मेट्रो सेवाओं के उपयोग को प्राथमिकता देने
वर्चुअल मीटिंग्स और ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस आयोजित करने
सप्ताह में 2 दिन Work From Home मॉडल लागू करने

जैसे कदमों पर जोर दिया है.

क्या अब यूपी में Work From Home कल्चर वापस आएगा?

कोरोना काल के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश सरकार ने फिर से “वर्क फ्रॉम होम” संस्कृति को बढ़ावा देने की बात कही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां संभव हो, वहां डिजिटल माध्यम से कामकाज को प्राथमिकता दी जाए ताकि ईंधन की बचत हो सके और सरकारी खर्च कम किया जा सके. सरकार का मानना है कि इससे ट्रैफिक दबाव भी घटेगा और पेट्रोल-डीजल की खपत में कमी आएगी.

मंत्रियों और अफसरों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

सरकार के फैसले का असर अब जमीनी स्तर पर भी दिखने लगा है. कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि स्वेच्छा से सरकारी गाड़ियों और सुरक्षा काफिलों का इस्तेमाल कम कर रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जल शक्ति राज्य मंत्री दिनेश खटीक ने अपने एस्कॉर्ट वाहन वापस कर दिए हैं और जिला दौरों के लिए बाइक इस्तेमाल करने का फैसला लिया है. वहीं दूसरे जिलों में भी अधिकारियों को सरकारी वाहनों के सीमित उपयोग के निर्देश दिए गए हैं.

क्या आम जनता से भी की गई अपील?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केवल सरकारी मशीनरी ही नहीं बल्कि आम लोगों से भी पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील की है. ANI के मुताबिक, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने लोगों से कहा है कि वे ईंधन की बचत करें और गैरजरूरी सोने की खरीदारी से बचें ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव कम किया जा सके.

क्या बढ़ते वैश्विक तनाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है?

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ता है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, ऐसे में ईंधन की बढ़ती कीमतें विदेशी मुद्रा भंडार और महंगाई दोनों पर दबाव डालती हैं. इसी वजह से केंद्र और राज्य सरकारें अब “कम खर्च, ज्यादा बचत” मॉडल पर फोकस करती नजर आ रही हैं.

Ravi Mishra

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