UP NEWS: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में सरकारी जमीन पर बने एक अवैध धार्मिक ढांचे को हटाए जाने के बाद पाकिस्तान को अचानक धार्मिक विरासत और अधिकारों की चिंता सताने लगी है। प्रशासन की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने आपत्ति जताते हुए इसे एक ऐतिहासिक इस्लामिक स्थल के खिलाफ कार्रवाई बताया। सवाल यह है कि जब भारत अपने यहां अदालत के आदेश के आधार पर कार्रवाई करता है, तो पाकिस्तान को इतनी बेचैनी क्यों होने लगती है?
दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब कुछ दिन पहले ही भारत ने पाकिस्तान के नारोवाल इलाके में एक हिंदू मंदिर को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। भारत ने पाकिस्तान से मामले की जांच कराने और मंदिर को बहाल करने की मांग की थी। ऐसे में सहारनपुर की कार्रवाई पर पाकिस्तान का बयान उसके दोहरे रवैये पर सवाल खड़े करता है।
सरकारी जमीन पर बने ढांचे पर हुई कार्रवाई
सहारनपुर में जिस मस्जिद को प्रशासन ने हटाया, वह जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय परिसर की जमीन पर बनी थी। प्रशासन के मुताबिक, यह सरकारी जमीन पर किया गया अनधिकृत कब्जा था। जुलाई में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने भी ढांचे को सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे की श्रेणी में मानते हुए इसे हटाने का आदेश दिया था।
मस्जिद प्रबंधन ने इस आदेश के खिलाफ जिला जज की अदालत में अपील की थी, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। इसके बाद प्रशासन ने शनिवार को अदालत के आदेश के आधार पर कार्रवाई करते हुए ढांचे को ध्वस्त कर दिया। यानी प्रशासन का दावा है कि कार्रवाई किसी मनमाने फैसले के तहत नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद की गई।
यूपी : सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद आज सुबह 5 बजे ढहा दी गई। कल रात भी इसे तोड़ने की सूचनाएं फैली तो DM ने भीड़ को ऐसा कहकर शांत किया कि मस्जिद सिर्फ सील की जाएगी। आज सुबह लोग नींद से उठे तो मस्जिद जमींदोज हो चुकी थी। 16 जुलाई को जिला प्रशासन ने इस मस्जिद का निर्माण… https://t.co/gii3i2xx1T pic.twitter.com/jkRM4XqxEf
— Sachin Gupta (@Sachingupta) September 5, 2026
पाकिस्तान को क्यों लगी मिर्ची?
सहारनपुर की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर भारतीय अधिकारियों पर निशाना साधा। पाकिस्तान ने इसे धार्मिक स्थल के खिलाफ कार्रवाई बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी मामले पर ध्यान देने की अपील की।
लेकिन यहां सवाल पाकिस्तान से ही है अगर किसी देश में अदालत के आदेश के बाद सरकारी जमीन से अनधिकृत निर्माण हटाया जाता है, तो इसमें पाकिस्तान को बीच में बोलने की जरूरत क्यों पड़ रही है? क्या पाकिस्तान अपने पड़ोसी देश के प्रशासनिक और न्यायिक मामलों पर टिप्पणी करने से पहले अपने देश में अल्पसंख्यकों और उनके धार्मिक स्थलों की स्थिति पर भी नजर डालेगा?
चार दिन पहले भारत ने PAK को दिखाया था आईना
पाकिस्तान की मौजूदा प्रतिक्रिया को भारत के कुछ दिन पहले दिए गए बयान के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। भारत ने नारोवाल में एक हिंदू मंदिर को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाए जाने की घटना पर पाकिस्तान के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
नई दिल्ली ने पाकिस्तान से घटना की जांच कराने और कथित रूप से क्षतिग्रस्त मंदिर को बहाल करने की मांग की थी। भारत ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान की जिम्मेदारी है कि वहां रहने वाले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के साथ-साथ उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की भी रक्षा की जाए।
प्रशासन ने दिया कानूनी कार्रवाई का हवाला
सहारनपुर की कार्रवाई को लेकर भारत में विपक्ष के कुछ नेताओं और मुस्लिम संगठनों ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कार्रवाई के तरीके और समय को लेकर आपत्ति जताई है। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई अदालत के आदेश और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।
अब पाकिस्तान की प्रतिक्रिया के बाद धार्मिक स्थलों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा फिर चर्चा में है। हालांकि, पाकिस्तान को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारत के एक प्रशासनिक मामले पर इतनी चिंता जताने से पहले क्या उसे अपने यहां अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण पर भी जवाब नहीं देना चाहिए?
