अमेरिका के टेनेसी राज्य में 30 सितंबर 2026 की रात मौत की सजा पाए एक कैदी के साथ ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने वहां की मृत्युदंड व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. 50 साल की क्रिस्टा पाइक को जहरीले इंजेक्शन के जरिए मौत देने की प्रक्रिया शुरू हुई. उन्हें दवा की दो खुराक दी गईं. लेकिन इसके बाद भी उनकी सांसें चलती रहीं.
करीब एक घंटे बाद तक उनके जिंदा होने के संकेत मिलते रहे. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वह सांस लेने के लिए संघर्ष करती और घुटन जैसी आवाजें करती सुनाई दीं. उनके शरीर में धड़कन भी मौजूद थी.फिर आखिरकार बीच मौत देने प्रकिया अचानक रोकनी पड़ी और उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया. इसके बाद अब अमेरिका में इस महिला को बचाने की खूब मांग की जा रही है तो आइए इस कहानी पर एक नजर में डिटेल से जानते हैं…
जिस महिला को उस रात टेनेसी में दो सौ साल से ज्यादा समय बाद मृत्युदंड पाने वाली पहली महिला बनना था, वही अब गंभीर हालत में अस्पताल में जिंदगी बचाने वाले इलाज पर है. घटना के बाद उनके वकीलों समेत कई विशेषज्ञ अब उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग कर रहे हैं. लेकिन इस भयावह घटना के पीछे करीब तीन दशक पुरानी एक ऐसी कहानी है, जिसकी शुरुआत एक किशोरी की हत्या से हुई थी.
कौन हैं अमेरिकन क्रिस्टा पाइक?
क्रिस्टा गेल पाइक का जन्म 10 मार्च 1976 को हुआ था. वह करीब तीन दशक से टेनेसी की मृत्युदंड सूची में बंद थीं. साल 1995 में क्रिस्टा पाइक पर अपनी 19 वर्षीय सहपाठी कोलीन स्लेमर की हत्या का आरोप लगा. उस समय पाइक की उम्र सिर्फ 18 साल थी. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पाइक अपने 17 वर्षीय प्रेमी टेडारिल शिप और एक अन्य व्यक्ति के साथ स्लेमर को एक सुनसान इलाके में ले गई थीं. वहां उसकी हत्या कर दी गई. इस हत्या ने उस समय पूरे इलाके को झकझोर दिया था. मामला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि जांच के दौरान पीड़िता के शरीर पर एक कथित पंचकोणीय निशान बनाए जाने की बात सामने आई थी. पाइक और शिप ने हत्या में अपनी भूमिका स्वीकार की थी. बाद में अदालत ने पाइक को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई.
1996 में मिली मौत की सजा, फिर शुरू हुआ इंतजार
30 मार्च 1996 को क्रिस्टा पाइक को मौत की सजा सुनाई गई. इसके बाद शुरू हुआ इंतजार का वह लंबा दौर, जो करीब 30 साल तक चला. मृत्युदंड की कोठरी में बंद पाइक के लिए हर बार फांसी की तारीख का मतलब होता था. शायद अब जिंदगी का आखिरी दिन करीब है. लेकिन कानूनी प्रक्रिया, अपील और अन्य कारणों से उनकी सजा लंबे समय तक टलती रही. करीब तीन दशक बाद आखिरकार 30 सितंबर 2026 की तारीख तय हुई.
इस बार सब कुछ अंतिम दिखाई दे रहा था. लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि उस रात मृत्युदंड की प्रक्रिया खुद एक ऐसे मोड़ पर पहुंच जाएगी, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी.
मौत का दिन आया…लेकिन मौत नहीं आई
30 सितंबर की रात क्रिस्टा पाइक को मृत्युदंड कक्ष में लाया गया. मौत देने के लिए पेंटोबार्बिटल नाम की दवा का इस्तेमाल किया जाना था. यह टेनेसी में जहरीले इंजेक्शन की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली दवाओं में से एक है. पहली खुराक दी गई. लेकिन पाइक की सांसें नहीं थमीं. इसके बाद दूसरी खुराक दी गई. फिर भी वह जिंदा थीं. गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब एक घंटे बाद तक प्रत्यक्षदर्शियों ने उन्हें सांस लेते, घुटन से जूझते और आवाजें निकालते सुना. उनके शरीर में धड़कन भी मौजूद थी. मौत देने की प्रक्रिया को आखिरकार रोकना पड़ा और कुछ ही देर पहले जिस महिला को राज्य मृत घोषित करने वाला था, उसे जीवन बचाने के लिए चिकित्सा केंद्र ले जाया गया.
दो खुराक के बाद भी चल रही थीं सांसें
इस घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यही था कि पाइक को जहरीले इंजेक्शन की दो खुराकें दिए जाने के बावजूद उनकी मौत नहीं हुई. गार्जियन के मुताबिक, उन्हें कुल 5 ग्राम पेंटोबार्बिटल दिया गया था. रिपोर्ट में इसे सामान्य परिस्थितियों में घातक मानी जाने वाली मात्रा बताया गया है. लेकिन पाइक का शरीर उस रात भी जिंदा था. उनकी कानूनी टीम के मुताबिक, अब यह भी स्पष्ट नहीं है कि लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी के कारण उनके मस्तिष्क को कितना नुकसान पहुंचा है. फिलहाल उनकी हालत गंभीर बताई गई है और उन्हें जीवन बचाने वाला चिकित्सा उपचार दिया जा रहा है.
सात सुइयों ने और बढ़ाए सवाल
मृत्युदंड कक्ष में मौजूद पाइक के वकील रैंडी स्पाइवी ने एक और चौंकाने वाला दावा किया. उन्होंने बताया कि उन्होंने पाइक की बाईं बांह में सात सुइयां लगते देखीं. उनके अनुसार, इनमें से एक सुई निकालते समय मुड़ी हुई दिखाई दी. यह दावा अब इस सवाल को जन्म दे रहा है कि पाइक के शरीर में दवा पहुंचाने के लिए नस ढूंढने में कितनी परेशानी हुई और क्या उन्हें पहले से मौजूद चिकित्सकीय परिस्थितियों को पर्याप्त रूप से ध्यान में रखा गया था. हालांकि, टेनेसी के सुधार विभाग का कहना है कि मृत्युदंड की निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का पालन किया गया.
क्या पहले ही दी गई थी चेतावनी?
इस कहानी का एक और गंभीर पहलू सामने आया है. गार्जियन के अनुसार, चिकित्सकीय विशेषज्ञ जोएल जिवोट ने अगस्त में पाइक के मामले की सुनवाई के दौरान उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई थी. उन्होंने बताया था कि पाइक के रक्त में प्लेटलेट्स की मात्रा अधिक थी, जिससे रक्त के थक्के बनने का खतरा हो सकता था. उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि करीब 30 साल तक मृत्युदंड की कोठरी में रहने और लंबे समय तक एकांत में रहने के कारण उनकी नसें कमजोर, छोटी और ढूंढने में मुश्किल हो सकती थीं. जिवोट के मुताबिक, उन्होंने इन जोखिमों के बारे में पहले ही चेतावनी दी थी. लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, मामले की सुनवाई करने वाले विशेष अधिकारी ने पेश किए गए अधिकांश सबूतों को स्वीकार नहीं किया.
फिर अचानक क्यों उठने लगी क्रिस्टा को बचाने की मांग?
यहीं से इस कहानी में एक और अप्रत्याशित मोड़ आता है. क्रिस्टा पाइक के वकील अब उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग कर रहे हैं. यह मांग उनके अपराध को सही ठहराने के आधार पर नहीं है. बल्कि यह मांग उस असफल मृत्युदंड प्रक्रिया और उसके बाद उनकी गंभीर हालत के संदर्भ में उठ रही है. पाइक की कानूनी सलाहकार सैंड्रा बैबकॉक ने गार्जियन से कहा कि कम से कम अब टेनेसी के गवर्नर बिल ली को उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल देना चाहिए. यानी करीब 30 साल तक मौत का इंतजार करने वाली पाइक के मामले में अब सवाल बदल गया है.
पहले सवाल था- उन्हें कब मौत दी जाएगी?
अब सवाल है- असफल मृत्युदंड के बाद उनके साथ आगे क्या होगा?
टेनेसी में पहले भी असफल हो चुकी है मृत्युदंड की कोशिश. क्रिस्टा पाइक की घटना टेनेसी में मृत्युदंड की प्रक्रिया के असफल होने का पहला मामला नहीं है. मई 2026 में टोनी कैरथर्स को भी जहरीले इंजेक्शन से मौत देने की कोशिश की गई थी. लेकिन चिकित्सा दल नस में दवा पहुंचाने के लिए आवश्यक व्यवस्था नहीं कर सका और प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई. उनके लिए बाद में नई तारीख तय की गई. पाइक की घटना के बाद टेनेसी में मृत्युदंड की प्रक्रिया को लेकर स्वतंत्र समीक्षा की मांग और तेज हो गई है.
अमेरिका में फिर गरम हुआ मृत्युदंड का मुद्दा
पाइक के मामले ने अमेरिका में मृत्युदंड को लेकर पुरानी बहस को फिर सामने ला दिया है. वकीलों, चिकित्सकों और धार्मिक समुदाय से जुड़े कुछ लोगों ने मृत्युदंड पर रोक लगाने की मांग की है. मृत्युदंड के विरोधियों का कहना है कि जहरीले इंजेक्शन को इंसान की मौत का नियंत्रित और चिकित्सकीय तरीका बताना सही नहीं है. वहीं टेनेसी का सुधार विभाग अपने निर्धारित नियमों के पालन की बात कह रहा है. अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में मृत्युदंड देने के दूसरे तरीकों को लेकर भी पहले विवाद सामने आते रहे हैं.
क्रिस्टा पाइक के बचपन और मानसिक स्वास्थ्य का भी हुआ जिक्र
पाइक के वकीलों ने उनकी सजा को कम कराने की कोशिशों के दौरान उनके बचपन की परिस्थितियों और कथित शोषण व उपेक्षा का भी जिक्र किया था. उनकी कानूनी टीम ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कुछ निदानों का भी हवाला दिया था, जिनमें बाइपोलर विकार और पीटीएसडी का उल्लेख शामिल है. हालांकि, ये बातें उनके कानूनी पक्ष की ओर से सजा कम कराने और दया की मांग से जुड़े तर्कों का हिस्सा रही हैं.
करीब 30 साल तक मौत का इंतजार…और फिर ऐसा मोड़
क्रिस्टा पाइक की कहानी सिर्फ एक असफल मृत्युदंड की कहानी नहीं है. यह कहानी 1995 में शुरू हुई, जब 18 साल की पाइक पर अपनी 19 वर्षीय सहपाठी की हत्या का आरोप लगा. 1996 में मौत की सजा मिली. फिर करीब तीन दशक तक मौत की कोठरी. हर गुजरता साल उन्हें उस अंतिम दिन के करीब ले जाता रहा और फिर 30 सितंबर 2026 की रात वह दिन भी आ गया. मृत्युदंड कक्ष के दरवाजे बंद हुए.
अब कैसी है क्रिस्टा पाइक की हालत?
उनकी मौत की सजा का क्या होगा, क्या उन्हें दोबारा मृत्युदंड देने की कोशिश की जाएगी, या उनकी सजा उम्रकैद में बदली जाएगी. इन सवालों का जवाब आगे की कानूनी प्रक्रिया और अधिकारियों के फैसलों से सामने आएगा. फिलहाल, तीन दशक तक मौत का इंतजार करने वाली इस कैदी की कहानी एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां मौत का आदेश मौजूद है, लेकिन मौत खुद उस आदेश को पूरा नहीं कर पाई.
