उत्तर प्रदेश

लोकसभा में शायरी के साथ गरजे रमेश अवस्थी, विपक्ष पर साधा निशाना- “मोदी नहीं रुकता” से गूंजा सदन

नई दिल्ली। लोकसभा में आज उस वक्त माहौल अचानक जोश और ऊर्जा से भर गया, जब कानपुर से बीजेपी सांसद रमेश अवस्थी ने अपने भाषण की शुरुआत शायरी से की। उनके अंदाज ने न केवल सदन का ध्यान खींचा, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक संदेश भी बेहद प्रभावी तरीके से पहुंचाया।

सांसद अवस्थी ने अपने संबोधन में शायराना लहज़े के साथ सरकार की नीतियों और नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उनकी पंक्तियों में जहां देशभक्ति का भाव दिखा, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर अटूट भरोसा भी झलकता नजर आया।

लोकसभा में क्या बोले रमेश अवस्थी?

सांसद रमेश अवस्थी ने अपने भाषण की शुरुआत और समापन इन प्रभावशाली पंक्तियों से किया।

“चमकता है जो सूरज बनकर वो अंधेरों से नहीं डरता,
जिसे हो देश की फ़िक्र वो चुनौतियों से नहीं डरता।
हवाएं लाख मुखलिस मगर चलना नहीं रुकता,
जुनून ए साहिल हो तो फिर दरिया नहीं रुकता।
बदलनी है हमें तकदीर इस भारत की अब यारों,
कदम जब बढ़ गए आगे तो फिर मोदी नहीं रुकता।”

इन पंक्तियों के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि सच्चा नेतृत्व कभी चुनौतियों से पीछे नहीं हटता, बल्कि उन्हें अवसर में बदल देता है।

क्या था विपक्ष पर निशाना?

अपने संबोधन में अवस्थी ने विपक्ष पर परोक्ष हमला करते हुए कहा कि देश के सामने आने वाली चुनौतियों से भागने के बजाय उनका सामना करना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष रचनात्मक सहयोग देने के बजाय केवल आलोचना करने में लगा हुआ है।

प्रधानमंत्री मोदी की क्यों की तारीफ?

सांसद अवस्थी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक का “सबसे प्रभावशाली और लोकप्रिय प्रधानमंत्री” बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रही हैं।

सदन में कैसा रहा माहौल?

अवस्थी के भाषण के दौरान सत्तापक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाकर जोरदार समर्थन जताया। शायरी और राजनीतिक संदेश का यह अनोखा मिश्रण न केवल प्रभावी रहा, बल्कि सदन की कार्यवाही में नई ऊर्जा भी भर गया।

क्या संदेश दे गया यह भाषण?

यह भाषण सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें देश के विकास, नेतृत्व की दृढ़ता और चुनौतियों से लड़ने का स्पष्ट संदेश भी छिपा था। साहित्यिक अंदाज में दिया गया यह संबोधन लोकसभा में चर्चा का विषय बन गया।

Ravi Mishra

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