दिल्ली-एनसीआर

सत्य निकेतन हादसे पर हाई कोर्ट दिल्ली सरकार को लगाई फटकार, MCD और DU पर भी उठाए सवाल

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन में PG की इमारत गिरने से सात लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने हादसे को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस त्रासदी के लिए केवल बिल्डिंग मालिक ही नहीं, बल्कि दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं।

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने कहा कि दिल्ली में इस तरह के हादसे बार-बार सामने आ रहे हैं। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आखिर क्या कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही अधिकारियों को राहत और बचाव अभियान तेज करने के निर्देश दिए, ताकि मलबे में फंसी जिंदगियों को बचाया जा सके।

सत्य निकेतन हादसे बिल्डिंग मालिक जिम्मेदार

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जिम्मेदारी सिर्फ इमारत के मालिक तक सीमित नहीं हो सकती। MCD और DU की भूमिका पर भी विचार करना जरूरी है, क्योंकि दिल्ली विश्वविद्यालय में बाहर से आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में छात्र निजी PG में रहने को मजबूर होते हैं।

कोर्ट ने सरकार से कहा कि छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर गंभीरता से काम किया जाना चाहिए। पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “आप (सरकार) अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते… ये 50 युवा छात्र अपने जीवन की शुरुआत की दहलीज पर हैं… इनमें से अधिकांश शायद अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। इससे ज्यादा दुखद और कुछ नहीं हो सकता।”

दिल्ली में बार-बार क्यों हो रहे ऐसे हादसे?

हाई कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि राजधानी में करीब हर दो साल में इस तरह की त्रासदी सामने आती है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उसकी ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट की टिप्पणी में PG में होने वाले अनधिकृत निर्माण और सुरक्षा मानकों की निगरानी को लेकर भी गंभीर चिंता दिखाई दी। पीठ ने कहा कि कई जगह दो मंजिल की अनुमति के बावजूद छह मंजिल तक निर्माण कर दिया जाता है और ऐसी स्थिति हादसे की वजह बन सकती है।

सरकार ने बचाव अभियान तेज करने का भरोसा दिया?

केंद्र, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और MCD की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार पूरे मामले की निगरानी कर रही है और कुछ समय की जरूरत है। मेहता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि अधिकारियों की ओर से सभी जरूरी फैसले लोगों के हित को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे और बचाव अभियान में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

हादसे के वीडियो को लेकर कोर्ट और सरकार ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उन वीडियो का भी मुद्दा उठा, जिनमें मलबे में फंसे या घायल लोगों को दिखाया जा रहा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर चिंता जताते हुए कहा, “मौत को सनसनीखेज नहीं बनाया जा सकता; त्रासदी को भी सनसनीखेज नहीं बनाया जा सकता।” कोर्ट ने भी पूरे मामले में संवेदनशीलता बरतने और राहत-बचाव कार्य को प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर दिया।

PG और हॉस्टल की सुरक्षा को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?

दिल्ली हाई कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से सरकार तक यह बात पहुंचाने को कहा कि छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि देश के भविष्य में निवेश करने वाले छात्रों के लिए सरकारी और विश्वविद्यालय स्तर पर हॉस्टल की स्थिति चिंताजनक है।

कोर्ट ने कहा, “आप देश के भविष्य में निवेश कर रहे हैं। जहां तक सरकार और विश्वविद्यालयों द्वारा संचालित हॉस्टलों की संख्या का सवाल है, स्थिति बेहद दयनीय है। इन PG को नियंत्रित करने के लिए कोई उचित व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। PG मालिक बिना किसी नियम-कायदे के धड़ल्ले से निर्माण करते हैं। अगर दो मंजिल बनाने की अनुमति होती है, तो छह मंजिल तक बना दी जाती हैं और संभवतः इसी तरह के अनियमित निर्माण का नतीजा यह हादसा है।”

क्या PG और हॉस्टल की होगी व्यापक जांच?

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था जांच के घेरे में आ गई है। हाई कोर्ट ने भी ऐसे ठिकानों की निगरानी और नियमन की जरूरत पर जोर दिया है। अदालत के निर्देशों के बाद MCD की ओर से PG और हॉस्टल का निरीक्षण करने की कार्रवाई भी सामने आई है। वहीं, हादसे को लेकर दाखिल PIL में भी निजी PG और हॉस्टल का सुरक्षा ऑडिट कराने तथा स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

हाई कोर्ट ने सरकार को कितने दिन में जवाब देने को कहा?

दिल्ली हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को याचिका पर अलग-अलग जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। सत्य निकेतन में रविवार को एक पांच मंजिला इमारत ढह गई थी। यह इमारत दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास लड़कों के PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी और हादसे के वक्त वहां मरम्मत का काम चल रहा था। हादसे में सात लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

Ravi Mishra

Recent Posts

सुप्रीम कोर्ट ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने से किया इनकार, लेकिन चुनाव आयोग से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को फिलहाल हटाने या निलंबित करने से…

3 weeks ago

शनि की साढ़ेसाती से कब मिलेगी राहत? कुंभ को 2027 में राहत, मीन और मेष वालों को करना होगा इंतजार

कुंभ, मीन और मेष राशि वालों पर इस समय शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव चल…

2 months ago

सहारनपुर में अवैध मस्जिद पर चला बुलडोजर तो तिलमिलाया पाकिस्तान, 100 साल पुराने मंदिर पर चुप्पी क्यों?

सहारनपुर में सरकारी जमीन पर बने अनधिकृत धार्मिक ढांचे को अदालत के आदेश के बाद…

2 months ago

Bigg Boss 20 में ईशा रिखी की धमाकेदार एंट्री, बादशाह से दूरी के बाद पहली बार खुलकर रखेंगी अपनी बात?

पंजाबी एक्ट्रेस ईशा रिखी अब Bigg Boss 20 के घर में नजर आएंगी। बादशाह से…

2 months ago

5 लाशें, ढेरों सवाल! सत्य निकेतन हादसे का जिम्मेदार कौन? MCD दफ्तर में तोड़फोड़, कमिश्नर से मांगा इस्तीफा

दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने से पांच लोगों की मौत हो…

2 months ago

This website uses cookies.