Khushwant Singh
Khushwant Singh: खुशवन्त सिंह का जन्म 2 फरवरी 1915 को पाकिस्तान में एक सिंख परिवार में हुआ था. उनकी गिनती भारत के फेसम पत्रकार, लेखक,उपन्यासकार और इतिहासकार में होती थी. उन्होंने पत्रकार के रूप में काफी ज्यादा लोकप्रियता हासिल की थी. वह जितने भारत में लोकप्रिय थे उतने ही पाकिस्तान में भी लोकप्रिय थे. उन्होंने किताब ट्रेन टू पाकिस्तान लिखी जिसके द्वारा वह बेहद लोकप्रिय हुए.
खुशवंत की राख से बना पाकिस्तान का स्कूल
खुशवंत सिंह पाकिस्तान के रेगिस्तान की गोद में बसे अपने छोटे से गांव हडाली को कभी भूल नहीं पाए. उनकी अखिरी इच्छा थी कि वह अपने पैतृक गांव हडाली में दफन होना चाहते थे. लेकिन उनकी यह तमन्ना पूरी नहीं हो सकी. हां लेकिन उनकी हड्डियों की राख से स्कूल की मरम्मत हुई और वहां पत्थर के बने स्मृति चिन्ह में लिखा गया कि-खुशवंत सिंह की याद में ‘यह वह स्थान है, जहां मेरी जड़े हैं, जिसे मेरे आंसुओं और तकलीफ ने सींचा है’. सदी के महान लेखक खुशवंत सिंह की रूह पाकिस्तान में बसती थी.
खुशवंत सिंह कई जगह रहें संपादक
खुशवंत सिंह पत्रकार के रूप में भी खुशवन्त सिंह ने बहुत ख्याति अर्जित की. वह 1951 में आकाशवाणी से जुड़े थे और 1951 से 1953 तक भारत सरकार के पत्र ‘योजना’ का संपादन किया. 1980 तक मुंबई से प्रकाशित प्रसिद्ध अंग्रेजी साप्ताहिक ‘इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ़ इंडिया’ और ‘न्यू डेल्ही’ के संपादक रहे. 1983 तक दिल्ली के प्रमुख अंग्रेज़ी दैनिक ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के संपादक भी वही थे.
सम्मान
भारत सरकार द्वारा साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें 1974 में पद्म भूषण और 2007 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. खुशवंत सिंह का 20 मार्च 2014 को निधन हुआ.
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