बिहार चुनाव
बिहार की सियासत में एक बार फिर नया मोड़ आया है. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल इमान ड्रम-बीटर्स के साथ लालू प्रसाद यादव के आवास पहुंचे और एलान किया कि उनकी पार्टी महागठबंधन (RJD-कांग्रेस) में शामिल होने को तैयार है. शर्त सिर्फ इतनी है कि सीमांचल की छह सीटें AIMIM को दी जाएं.
2020 के विधानसभा चुनाव में AIMIM ने सीमांचल में पांच सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था. हालांकि, इनमें से चार विधायक बाद में राजद में शामिल हो गए. अब असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी फिर से गठबंधन में आने की कोशिश कर रही है, लेकिन आरजेडी ने इसे लेकर अनिच्छा जताई है. सवाल यह है कि आखिर तेजस्वी यादव AIMIM को महागठबंधन का हिस्सा क्यों नहीं बनाना चाहते?
असदुद्दीन ओवैसी ने NDTV से कहा, “अख्तरुल इमान ने लालू प्रसाद यादव को दो और तेजस्वी यादव को एक पत्र लिखा है. हमने साफ लिखा कि हमें सिर्फ छह सीटें चाहिएं, मंत्री पद नहीं. इससे ज्यादा हम क्या कर सकते हैं?”
उन्होंने यह भी तंज कसा कि, “जब हमारे चार विधायक RJD में चले गए, तब किसी को आपत्ति नहीं हुई. लेकिन जब बीजेपी ने शिवसेना के विधायक लिए, तो हंगामा खड़ा हो गया.”
सीमांचल की चार जिलों – पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज – में मुस्लिम आबादी 38% से 68% तक है. 2020 में यहां AIMIM ने पांच सीटें जीतीं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन इलाकों में मुसलमान वोटर AIMIM को RJD का विकल्प मानकर वोट करते हैं. यही वजह है कि AIMIM यहां अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है.
RJD नेताओं का कहना है कि मुस्लिम वोट उनका पारंपरिक वोट बैंक है. AIMIM को सीटें देकर वे अपने ही वोट बैंक में सेंध क्यों लगाने देंगे? उनका तर्क है कि AIMIM से जीते चारों विधायक दरअसल RJD के नाराज नेता थे, जो बाद में फिर से पार्टी में लौट आए.
एक RJD नेता ने सवाल उठाया, “क्या ओवैसी हैदराबाद में हमें सीटें देंगे अगर हम वहां गठबंधन करें?” इससे साफ है कि राजद AIMIM की मांग को लेकर गंभीर नहीं है. RJD का डर – बीजेपी को मिल जाएगा ध्रुवीकरण का मौका, RJD को यह भी डर है कि अगर AIMIM महागठबंधन में शामिल हुई तो बीजेपी चुनाव को हिंदू बनाम मुस्लिम की लड़ाई बना सकती है. इससे राज्यभर में ध्रुवीकरण बढ़ेगा और बीजेपी को फायदा मिलेगा. RJD बिहार की पूरी जंग हारकर सिर्फ सीमांचल की जीत नहीं चाहती.
2020 चुनाव में सीमांचल की 24 सीटों में NDA ने 12 (BJP 8, JDU 4), महागठबंधन ने 7 (कांग्रेस 5, RJD 1, CPI-ML 1) और AIMIM ने 5 सीटें जीतीं. विश्लेषक मानते हैं कि अगर AIMIM अलग रही तो वोट बंटवारे का फायदा NDA को मिलेगा.
जहां AIMIM का गठबंधन में शामिल होना महागठबंधन को फायदा पहुंचा सकता है, वहीं RJD मानती है कि लंबी अवधि में यह उनके लिए खतरा साबित होगा. इसलिए RJD भले ही छोटे दलों जैसे पासवान गुट और JMM को साथ ले रही है, लेकिन AIMIM पर सख्ती से ‘ना’ कह रही है.
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