ChandraGrahan202
Chandra Grahan: आज साल का आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है, जिसे भारत समेत दुनिया के कई देशों में देखा जा सकेगा। यह ग्रहण ज्योतिष और खगोल विज्ञान – दोनों ही दृष्टियों से बेहद खास माना जा रहा है। पंचांग के अनुसार, चंद्र ग्रहण की शुरुआत रात 9 बजकर 58 मिनट पर होगी। इसका मध्य काल 11 बजकर 41 मिनट पर रहेगा और यह रात 1 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगा। यानी कुल मिलाकर यह खगोलीय घटना लगभग 3 घंटे 28 मिनट तक चलेगी।
ग्रहण का सूतक काल दोपहर 12 बजकर 58 मिनट से ही शुरू हो चुका है। इस अवधि में धार्मिक परंपराओं के अनुसार कोई भी शुभ कार्य, यात्रा, पूजा-पाठ या भोजन पकाना वर्जित माना जाता है। यही कारण है कि सूतक शुरू होने के साथ ही मंदिरों के पट भी बंद कर दिए जाते हैं।
भगवान का ध्यान करें – मंत्र जप, भजन या ध्यान करना सबसे शुभ माना जाता है।
स्नान और दान – ग्रहण शुरू होने से पहले और ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करें। ग्रहण के बाद दान-पुण्य का खास महत्व है।
भोजन को सुरक्षित रखें – पके हुए भोजन और पानी में तुलसी या कुश का टुकड़ा डाल दें। इससे भोजन अशुद्ध नहीं होता।
ध्यान और साधना – इस समय किया गया ध्यान, जप-तप और पूजा कई गुना फल देता है।
ग्रहण खत्म होने के बाद – घर को गंगाजल या शुद्ध पानी से छिड़कें और भगवान की आरती करें।
भोजन न करें – ग्रहण के दौरान अन्न, फल या पानी ग्रहण करना वर्जित है (बच्चे, बुजुर्ग और रोगी अपवाद हैं)।
सोना नहीं चाहिए – ग्रहण काल में सोना अशुभ माना जाता है।
धार्मिक कार्य न करें – पूजा, हवन या कोई भी शुभ कार्य ग्रहण में नहीं करना चाहिए।
बाहर निकलना टालें – खासकर गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में बाहर जाने से बचना चाहिए।
काटना-छीलना या सिलाई-बुनाई न करें – ये काम भी अशुभ माने जाते हैं।
| क्या नहीं करना चाहिए | कारण / मान्यता | क्या करना चाहिए | लाभ / कारण |
|---|---|---|---|
| सोना नहीं चाहिए | नकारात्मक ऊर्जा असर डाल सकती है | भगवान का नाम जपना और प्रार्थना करना | मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा |
| कैंची, चाकू या नुकीली चीज़ का उपयोग नहीं | बच्चे पर बुरा असर पड़ने की मान्यता | मंत्र जाप और ध्यान करना | गर्भस्थ शिशु पर अच्छा प्रभाव |
| ग्रहण काल में खाना-पीना नहीं | अशुद्ध और हानिकारक माना जाता है | प्रसन्न चित्त रहना | शिशु के मानसिक विकास के लिए अच्छा |
| बाहर घूमना या आकाश की ओर देखना नहीं | अशुभ प्रभाव की संभावना | ग्रहण से पहले और बाद में स्नान करना | शुद्धि और मानसिक सुकून |
| नकारात्मक सोच और गुस्सा नहीं करना | गर्भस्थ शिशु पर बुरा असर | खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी/कुश डालना | भोजन शुद्ध और सुरक्षित रहता है |
| सिलाई-कढ़ाई या किसी भी तरह का काटने का काम नहीं | पारंपरिक मान्यता अनुसार अशुभ | ग्रहण के बाद दान करना | धार्मिक मान्यता के अनुसार शुभ फल |
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