( Sora Ai: Image)
मध्य प्रदेश के रीवा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो सिर्फ गैस सप्लाई नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर रहा है। एक तरफ एजेंसी “गैस नहीं है” कह रही है, दूसरी तरफ सिस्टम में डिलीवरी दिख रही है और बाजार में महंगे दामों पर सिलेंडर मिलने की चर्चा है बीच में पिस रही है एक 65 साल की बुजुर्ग महिला।
मामला Indane – Konikalan Gramin Vitrak गैस एजेंसी का है, जहां उपभोक्ता श्रीमती सूर्यकली द्विवेदी को सिलेंडर देने से साफ इनकार कर दिया गया। जब उनका बेटा एजेंसी पहुंचा, तो मालिक जासुवेंद तिवारी ने कहा—“गैस उपलब्ध नहीं है।”
स्थिति तब बिगड़ गई जब बेटे ने फोन पर बात की। आरोप है कि एजेंसी मालिक ने न सिर्फ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, बल्कि यह तक कह दिया कि सरकार गैस को लेकर लोगों को गुमराह कर रही है। इस पर जब सौरभ द्विवेदी ने उनके ये पूछा कि गैस ऑटोमैटिक डिलवरी कैसे होती है तो वह सरकार और ग्राहक पर भड़कते हुए बोले-“तुम कहीं के कलेक्टर नहीं हो जो करना है कर लें नहीं देंगे गैस, तुम जैसे को मैं …. में रखता हूं”
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 16 मार्च 2026 को गैस सिलेंडर बुक किया गया था और उसका DAC नंबर भी जारी हुआ। लेकिन बाद में सिस्टम में ऑटोमैटिक डिलीवरी दिखा दी गई, जबकि हकीकत में सिलेंडर मिला ही नहीं। यह सीधे-सीधे रिकॉर्ड में गड़बड़ी और उपभोक्ता के साथ धोखाधड़ी की आशंका को जन्म देता है।
परिवार का दावा है कि जहां एजेंसी गैस खत्म होने की बात कर रही है, वहीं बाजार में वही सिलेंडर 2500–3000 रुपये तक में मिलने की बात सामने आ रही है। ऐसे में कालाबाजारी के शक ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि एजेंसी मालिक ने बातचीत के दौरान गाली-गलौज और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, जो किसी भी उपभोक्ता के साथ अस्वीकार्य है।
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