नोएडा के 28 वर्षीय निवासी Nikki Bhati की मौत के नौ महीने बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में है. इस केस में लगातार नए मोड़ सामने आ रहे हैं- जहां एक तरफ परिवार ने समझौते की बात कही है, वहीं दूसरी तरफ अहम गवाह का बयान बदलना और घटनास्थल को लेकर विरोधाभासी दावे पूरे केस को उलझा रहे हैं.
आग लगने से हुई थी मौत
निकी भाटी की मौत 21 अगस्त पिछले साल दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में गंभीर जलने के कारण हुई थी. आरोप है कि उनके पति Vipin Bhati और सास दया भाटी ने घर में ज्वलनशील पदार्थ डालकर उन्हें आग के हवाले कर दिया था. यह आरोप उनकी बहन कंचन की शिकायत पर दर्ज हुआ था. घटना के बाद कुछ वीडियो भी सामने आए थे, जिनमें घटना से पहले के तनावपूर्ण हालात दिखने का दावा किया गया था, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया था.
- परिवार और ससुराल पक्ष में समझौता
सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब बताया गया कि निक्की के परिवार ने आरोपित ससुराल पक्ष के साथ समझौता कर लिया है. निक्की के पिता ने कहा कि संपत्ति को उनके बेटे के नाम ट्रांसफर किया गया है, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझाने की बात सामने आई.
- मुख्य गवाह कंचन का पलट गया बयान
मामले में अहम गवाह रही निक्की की बहन Kanchan Bhati ने अदालत में अपना बयान बदल दिया है. पहले उन्होंने आरोप लगाया था कि पति और ससुराल वालों ने मिलकर निक्की को आग लगाई, लेकिन बाद में उन्होंने कोर्ट में कहा कि घटना के समय घर के अंदर कोई मौजूद नहीं था. इस बदलाव के बाद अभियोजन पक्ष की स्थिति कमजोर होती दिख रही है.
- पारिवारिक रिश्तों में नया मोड़
निक्की की बहन कंचन, जो पहले माता-पिता के साथ रह रही थीं, अब अपने पति के साथ नए घर में रहने की तैयारी कर रही हैं. परिवार का दावा है कि उनके ससुराल पक्ष की ओर से अब उनके वैवाहिक जीवन में कोई दखल नहीं दिया जाएगा.
- केस पर असर और जमानत की तैयारी
सरकारी वकील ने माना है कि मुख्य गवाह के पलटने से केस कमजोर हुआ है. वहीं बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि वे जल्द ही हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल करेंगे. इससे पहले इस मामले में कई आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, जबकि मुख्य आरोपी अभी भी जेल में है.
- पुलिस को समझौते की जानकारी नहीं
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दोनों परिवारों के बीच हुए कथित समझौते की कोई आधिकारिक जानकारी उन्हें नहीं दी गई है. पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर चार्जशीट दाखिल की गई थी और अब मामला अदालत के अधीन है. इस पूरे केस में शुरुआत से ही कई विरोधाभासी बयान, बदलते गवाह और कानूनी मोड़ सामने आते रहे हैं, जिससे मामला लगातार जटिल होता जा रहा है.
