Munawwar Rana Passed Away: माँ का मतलब समझा गए मुनव्वर राणा, पढ़िए बेहतरीन शेर


माँ पर शायरी

चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है, मैं ने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है.

माँ पर शायरी

अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा, मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है.

माँ पर शायरी

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है, माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है.

माँ पर शायरी

किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई, मैं घर में सब से छोटा था मिरे हिस्से में माँ आई.

माँ पर शायरी

जब भी कश्ती मिरी सैलाब में आ जाती है, माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है.

माँ पर शायरी

कल अपने-आप को देखा था माँ की आँखों में, ये आईना हमें बूढ़ा नहीं बताता है.

माँ पर शायरी

तेरे दामन में सितारे हैं तो होंगे ऐ फ़लक, मुझ को अपनी माँ की मैली ओढ़नी अच्छी लगी.

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