Uttarakhand UCC Bill
Uttarakhand UCC Bill : उत्तराखंड विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पास होने के बाद उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है. बीजेपी के सभी विधायकों ने ध्वनि मत से UCC का विधेयक पारित किया, 80 प्रतिशत सहमति के साथ यह प्रस्ताव स्वीकृत किया गया. सभी सदस्यों ने फिर सदन में जय श्रीराम के जयकारे लगाए. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को समान नागरिक संहिता पर बहस के दौरान कहा कि राज्य विधानमंडल समान नागरिक संहिता के पारित होने के साथ इतिहास रचने जा रहा है और राज्य का प्रत्येक नागरिक गर्व से भर गया है.
समान नागरिक संहिता जो सभी समुदायों के लिए समान या समान कानून का प्रस्ताव करती है, कल मुख्यमंत्री द्वारा विशेष सत्र के दौरान पेश की गई थी. सदन में सीएम धामी ने कहा “आज इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनते हुए, न केवल इस सदन को बल्कि उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक को गर्व की अनुभूति हो रही है.” वहीं सीएम धामी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा 12 फरवरी 2022 को लिया संकल्प आज पूरा हुआ है. इस विधेयक की मांग पूरे देश को थी, जिसे आज देवभूमि में पारित किया गया. लोग अलग-अलग बातें कर रहे थे लेकिन आज चर्चा के दौरान स्पष्ट हो गया कि यह कानून किसी के खिलाफ नहीं. मुख्यमंत्री ने यूसीसी पर अपने विचार साझा करने के लिए विपक्ष सहित सभी विधानसभा सदस्यों को धन्यवाद दिया.
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा, राज्य की देवतुल्य जनता ने हमें इस उद्देश्य को पूरा करने का अवसर दिया, उन्होंने अपना आशीर्वाद दिया और हमें फिर से सरकार बनाने का मौका दिया. सरकार बनने के तुरंत बाद, पहली कैबिनेट बैठक में ही एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया. समान नागरिक संहिता बनाने के लिए गठित की गई थी. 27 मई 2022 को सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया था. सीमावर्ती गांव माणा से शुरू हुई यह जनसंवाद यात्रा समाप्त हुई.
उन्होंने कहा, “2.32 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए. राज्य के लगभग 10 प्रतिशत परिवारों ने कानून बनाने के लिए अपने सुझाव दिए. यह हमारे राज्य की देवतुल्य जनता की जागरूकता का प्रत्यक्ष प्रमाण है.” मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सदन से निकलने वाली समान अधिकार की गंगा नागरिकों के जीवन का कल्याण करेगी.
उन्होंने कहा, “जिस प्रकार इस देवभूमि से निकलने वाली मां गंगा अपने तटों पर रहने वाले सभी प्राणियों को बिना किसी भेदभाव के सिंचित करती है, उसी तरह इस सदन से निकलने वाली समान अधिकार की गंगा हमारे सभी नागरिकों के जीवन का पोषण करेगी। हम संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित करेंगे.”
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