Rahat Indori: मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं…राहत इंदौरी के शेर


मौसम

मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता, यहाँ हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी.

एकता

हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं, मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं.

मोहब्बत

सूरज सितारे चाँद मिरे साथ में रहे, जब तक तुम्हारे हाथ मिरे हाथ में रहे.

दोस्ताना

एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो, दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो.

दिल

बोतलें खोल कर तो पी बरसों, आज दिल खोल कर भी पी जाए.

रुस्वाई

अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है, उम्र गुज़री है तिरे शहर में आते जाते.

फ़रहाद

मैं पर्बतों से लड़ता रहा और चंद लोग, गीली ज़मीन खोद के फ़रहाद हो गए.

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