Kaifi Azmi : ‘बस इक झिजक है यही हाल-ए-दिल सुनाने में….’ तबियत मस्त हो जाएगी पढ़कर कैफ़ी आज़मी के शेर
Ravi Mishra
May 11, 2024
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बस इक झिजक है यही हाल-ए-दिल सुनाने में, कि तेरा ज़िक्र भी आएगा इस फ़साने में.
इश्क़
झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं, दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं.
आरज़ू
इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं, दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बाद.
इंसान
बस्ती में अपनी हिन्दू मुसलमाँ जो बस गए, इंसाँ की शक्ल देखने को हम तरस गए.
मौत
रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई, तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई.
ग़म
तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या ग़म है जिस को छुपा रहे हो.
वीरानी
अब जिस तरफ़ से चाहे गुज़र जाए कारवाँ, वीरानियाँ तो सब मिरे दिल में उतर गईं.
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