Gulzar Shayari : आइना देख कर तसल्ली हुई… गुलजार साहब की शायरी
Sagar Dwivedi
March 10, 2024
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इश्क़
आप के बा'द हर घड़ी हम ने, आप के साथ ही गुज़ारी है.
आईना
आइना देख कर तसल्ली हुई, हम को इस घर में जानता है कोई.
तन्हाई
ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा, क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा.
कमी
शाम से आँख में नमी सी है, आज फिर आप की कमी सी है.
इंतिज़ार
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़, किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे.
वक़्त
वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर, आदत इस की भी आदमी सी है.
इश्क़
कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ, उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की.
भरोसा
आदतन तुम ने कर दिए वादे, आदतन हम ने ए'तिबार किया.
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