Gulzar Poetry: कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है, ज़िंदगी एक नज़्म लगती है… गुलज़ार के फेमस शेर


इंतिज़ार

जिस की आँखों में कटी थीं सदियाँ, उस ने सदियों की जुदाई दी है.

ज़िंदगी

कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है, ज़िंदगी एक नज़्म लगती है.

वक़्त

हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते, वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते.

इंतिज़ार

हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में, रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया.

तन्हाई

अपने साए से चौंक जाते हैं, उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा.

दास्ताँ

कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था, आज की दास्ताँ हमारी है.

ख़्वाब

तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं, सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं.

Muslim In Vatican City : दुनिया का ऐसा अनोखा देश जहां एक भी नहीं मिलेगा मुस्लिम