Tahazeeb Hafi : अपनी मस्ती में बहता दरिया हूँ….तहजीब हाफी के चुनिंदा शेर
Suman
April 14, 2024
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बारिश
मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ, पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे.
आवाज़
तेरा चुप रहना मिरे ज़ेहन में क्या बैठ गया, इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया.
दरिया
अपनी मस्ती में बहता दरिया हूँ, मैं किनारा भी हूँ भँवर भी हूँ.
दास्ताँ
दास्ताँ हूँ मैं इक तवील मगर, तू जो सुन ले तो मुख़्तसर भी हूँ.
छाँव
वो जिस की छाँव में पच्चीस साल गुज़रे हैं, वो पेड़ मुझ से कोई बात क्यूँ नहीं करता.
रात
ये एक बात समझने में रात हो गई है, मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है.
बरसात
बता ऐ अब्र मुसावात क्यूँ नहीं करता, हमारे गाँव में बरसात क्यूँ नहीं करता.
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