Waseem Barelvi Sher: शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ…वसीम बरेलवी के शेर


आँसू

वैसे तो इक आँसू ही बहा कर मुझे ले जाए, ऐसे कोई तूफ़ान हिला भी नहीं सकता.

इश्क़

आते आते मिरा नाम सा रह गया, उस के होंटों पे कुछ काँपता रह गया.

स्वागत

तुम आ गए हो तो कुछ चाँदनी सी बातें हों, ज़मीं पे चाँद कहाँ रोज़ रोज़ उतरता है.

दोस्ती

शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ, कीजे मुझे क़ुबूल मिरी हर कमी के साथ.

शाम

शाम तक सुब्ह की नज़रों से उतर जाते हैं, इतने समझौतों पे जीते हैं कि मर जाते हैं.

देखना

तुम मेरी तरफ़ देखना छोड़ो तो बताऊँ, हर शख़्स तुम्हारी ही तरफ़ देख रहा है.

आँसू

मुसलसल हादसों से बस मुझे इतनी शिकायत है, कि ये आँसू बहाने की भी तो मोहलत नहीं देते.

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