Tahazeeb Haafee : “मैं जिस के साथ कई दिन गुज़ार आया हूँ…” तहज़ीब हाफ़ी के शेर
Sagar Dwivedi
April 17, 2024
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आरज़ी
इक तिरा हिज्र दाइमी है मुझे, वर्ना हर चीज़ आरज़ी है मुझे.
समुंदर
तमाम नाख़ुदा साहिल से दूर हो जाएँ, समुंदरों से अकेले में बात करनी है.
उदासी
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर, ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है.
रात
मैं जिस के साथ कई दिन गुज़ार आया हूँ, वो मेरे साथ बसर रात क्यूँ नहीं करता.
जंगल
पेड़ मुझे हसरत से देखा करते थे, मैं जंगल में पानी लाया करता था.
सुख़न
मैं सुख़न में हूँ उस जगह कि जहाँ, साँस लेना भी शाइरी है मुझे.
मसअला
तुझ को पाने में मसअला ये है, तुझ को खोने के वसवसे रहेंगे.
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